राज्य पोषण मिशन,

उत्तर प्रदेश सरकार

   पूछे जाने वाले सवाल
यह पुस्तिका किसके द्वारा प्रयोग की जानी है?

इस पुस्तिका का प्रयोग निम्न अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा सकता है।

  • आंगनबाड़ी कार्यकत्री
  • आशा/ए.एन.एम.

परामर्श किस-किस को दिया जा सकता है?

  • गर्भवती/धात्री महिलाओं को।
  • दो वर्ष तक के बच्चों तथा गम्भीर अल्प वजन (लाल श्रेणी) वाले पांच वर्ष तक के बच्चों की माताओं को।
  • घर के अन्य सदस्य-सास, पति को।
  • ग्राम प्रधान एवं ग्राम स्वास्थ्य पोषण स्वच्छता समिति के सदस्यों को।

परामर्श किन-किन मुद्दों पर दिया जा सकता है?

  • गर्भवती एवं धात्री माताओं का पोषण।
  • 0-6 माह तक के बच्चों में शीघ्र व केवल स्तनपान।
  • 6 माह से 2 साल तक के बच्चों में पूरक आहार। /li>
  • बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों का सम्पूरण।
  • बच्चों में वृद्धि निगरानी।
  • स्वच्छता एवं साफ-सफाई
  • प्रजनन स्वास्थ्य।

परामर्श कब-कब दिया जा सकता है?

  • महीने में कम से कम सात दिन
  • तीन दिन आंगनबाड़ी केन्द्र पर पूरक आहार के वितरण के दौरान हर महीने की 5, 15 एवं 25 तारीख को या फिर आई.सी.डी.एस. द्वारा निर्धारित दिवस पर।
  • चार साप्ताहिक दिवस, सप्ताह में एक-एक बार किसी भी दिन, जब भी गर्भवती महिला और बच्चे माँ के साथ आंगनबाड़ी केन्द्र पर खाना खाने के लिये आएंगे। /li>
  • ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के अवसर पर।/li>

परामर्श देते समय निम्न बातों को ध्यान रखना चाहिये?

  • पहले अभिवादन करना।
  • उनकी सहायता करना।
  • फिर प्रश्न पूछना।/li>
  • दोबारा मिलकर पहले दिये संदेषों को दोहराना व अपनाये गये व्यवहार को प्रोत्साहित करना।/li>
  • उनको सही बातें/व्यवहार से अवगत कराना।

समूह चर्चा के दौरान परामर्श एवं प्रदर्शन

समूह चर्चा के दौरान सभी लाभार्थियों को एक घेरे में बिठाये, परामर्श दाता संवाद शुरू करने के लिए परामर्श विषय संबंधित कुछ प्रष्न पूछें और समूह में उपस्थित लोग अपने अनुभवों को सबके साथ बांटे, इसके आधार पर ही परामर्शदाता सही व्यवहारों और संदेषों को समूह के लोगों को समझाने में सहायता करें।

गृह भ्रमण के दौरान परामर्श एवं प्रदर्शन

गृह भ्रमण के दौरान समूह चर्चा में दिये परामर्ष को दोहराएं और हर लाभार्थी की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी समस्याओं का भी समाधान करने में उनकी सहायता करें।

गर्भवती एवं धात्री महिला को पोषण के बारे में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिये?

  • नीचे दी गई तालिका में से कम से कम चार या उससे अधिक खाद्य समूहों को दैनिक भोजन में शामिल करने को कहें।

    क्र.सं. विभिन्न प्रकार के खाद्य समूह खाद्य समह के अन्तर्गत आने वाले खाद्य पदार्थ विभिन्न प्रकार के खाद्य समूह से मिलने वाले लाभ
    1 अनाज, कन्द और मूल चावल, गेहूँ, बाजरा, जवार, आलू, शकरकन्द दैनिक कार्यों को करने की ऊर्जा व शक्ति मिलती है।
    2 दालें, फलियाँ एवं मेवा चना-मूंग, अरहर, मसूर, दाल, मटर, छोले, राजमा शारीरिक वृद्धि एवं विकास अच्छा होता है।
    3 दूध एवं दुग्ध पदार्थ दूध, दही, मट्ठा, छाछ, पनीर मानसिक विकास तेजी से होती है व हड्डियाँ भी मजबूत होती हैं।
    4 मांसाहारी भोजन मांस, मछली, कलेजी मांसपेशियाँ मजबूत बनती हैं।
    5 विटामिन युक्त फल एवं सब्जियां (नारंगी, पीले रंग की फल एवं सब्जियाँ) पपीता, आम, संतरे, कद्दू, गाजर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं, मानसिक विकास तेजी से होता है, रतौंधी से बचाव होता है।
    6 अन्य फल एवं सब्जियाँ (हरी पत्तेदार सब्जियाँ एवं अन्य फल) पालक, सरसों का साग, बथुआ, मेंथी, लौकी, सेम, तुरोयी, करेला शरीर में खून की वृद्धि होती है व बीमारियों से बचाव होता है।
    7 अंडे अंडे मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाता है।

  • गर्भावस्था के दौरान एक अतिरिक्त आहार लें। थोड़े-थोड़े अन्तराल पर भोजन ग्रहण करें, (कम से कम 3 बार) और पहले की अपेक्षा डेढ़ गुना मात्रा में भोजन करें, और साथ ही दो बार नाष्ता भी करें, इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का उचित विकास होगा। धात्री महिला पहले से दोगनी मात्रा में आहार लें।
  • खाद्य समूह एवं मात्रा के बारे में तालिका के अनुसार परामर्ष दें और एक पाव (250 मिली) के कटोरे से मात्रा का प्रदर्षन करें।
खाद्य समूह मात्रा (250उस की कटोरी)
गाढ़ी दाल 2 कटोरी’
रोटी/चावल 6-8 पीस/4 कटोरी
गहरी हरी पत्तेदार सब्जी 1 कटोरी
नारंगी/पीले रंग की फल एवं सब्जी 1 कटोरी
दूध अथवा दूध से बने पदार्थ 1 ग्लास/1 कटोरी
मांसाहारी महिलायें अपने पसन्द के अनुसार निम्न चीजें दैनिक भोजन में शामिल कर सकती हैं
अंडा 1 पीस
मांस/मछली/कलेजी 1 पीस (माचिस की डिब्बी के बराबर)
दैनिक आहार के अलावा गर्भवती महिला पौष्टिक नाष्ता भी लें
पौष्टिक नाष्ता 2 बार
गर्भवती महिला के लिए दैनिक भोजन चार्ट

गर्भावस्था में वजन वृद्धि को मापें

  • गर्भावस्था के दौरान 9 से 11 कि.ग्रा. वजन बढ़ता है। (हर महीने औसतन 15 कि0ग्रा0 से 2 कि0ग्रा0 वजन बढ़ता है)
  • हर माह ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर वजन वृद्धि की माप करायें।

गर्भावस्था में आयरन की गोली का सेवनः

  • पहली तिमाही के बाद 1 गोली प्रतिदिन की दर से 180 गोलियाँ आयरन की लें। एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम) होने पर 2 गोली प्रतिदिन।
  • आयरन की गोली, जहाँ तक सम्भव हो खाना खाने के एक घण्टे बाद या रात में लें। ऐसा करने से आयरन की गोली के पाष्र्व प्रभावों जैसे-उल्टी आना, जी मिचलाना, चक्कर आना, सर भारी होना इत्यादि से बचा जा सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोली का सेवन बच्चों के बढ़ने और उनके मस्तिष्क के विकास में मदद करता है। गर्भावस्था में आयरन की कमी होने पर माँ को एनीमिया हो सकता है, जो कि माँ व बच्चे दोनों में खतरे होने की सम्भावना बढ़ाता है, प्रसव उपरान्त माँ को अत्यधिक रक्तस्राव होना एवं बच्चे का जन्म के समय कम वजन का होना इत्यादि।
  • गम्भीर एनीमिया (हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से कम) होने पर महिला को स्वास्थ्य केन्द्र पर संदर्भित करें, जहाँ पर महिला को डाक्टर की सलाह पर आयरन का इंजेक्षन लगेगा या खून चढ़ाया जायेगा।

आंगनबाड़ी केन्द्र पर मिलने वाले अनुपूरक पोषाहार का उपभोग केवल गर्भवती एवं धात्री महिला द्वारा किया जाना चाहिये, पूरे परिवार द्वारा नहीं।

गर्भावस्था में निम्न बातों का ध्यान रखेंः

  • रात में कम से कम 8 घंटे और दिन में 2 घंटे की नींद लें। कोई भी भारी वस्तु नहीं उठायें या कोई भी कठिन मेहनत न करें।
  • परिवार के सदस्य गर्भवती महिला के दैनिक कार्यों में सहायता करें तथा सभी जाँचों हेतु उसे अस्पताल/केन्द्र पर लेकर जायें।

स्तनपान कब आरम्भ करना चाहिए, केवल स्तनपान कब तक कराना चाहिए?

गर्भवती महिला के लिये स्तनपान सम्बन्धी जानकारीः

  • जन्म के तुरन्त बाद नवजात षिषु को एक घन्टे के अंदर स्तनपान करायें। इससे दूध भी जल्दी उतरता है।
  • शिशु को छः माह तक केवल माँ का दूध दें। (पानी भी नहीं)।

स्तनपान कब आरम्भ करना चाहिए, केवल स्तनपान कब तक कराना चाहिए?

गर्भवती महिला के लिये स्तनपान सम्बन्धी जानकारीः

  • जन्म के तुरन्त बाद नवजात शिशु को एक घन्टे के अंदर स्तनपान करायें। इससे दूध भी जल्दी उतरता है।
  • शिशु को छः माह तक केवल माँ का दूध दें। (पानी भी नहीं)।

क्या बच्चे को माँ के दूध के अलावा कुछ और भी देना चाहिए?

  • शिशु को पानी, घुटी, शहद, चीनी का पानी, गाय या भैंस का दूध आदि कुछ भी नहीं पिलायें। केवल माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध (खीस) जरूर दें, यह बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है व संक्रमण से बचाव करता है।
  • डॉक्टर के निर्देशानुसार आवश्यकता पड़ने पर ओ0आर0एस0, वैक्सीन, विटामिन व मिनरल का सिरप दे सकते हैं।

माँ और बच्चे को स्तनपान से क्या लाभ है?

स्तनपान से शिशु को लाभः

  • माँ का दूध 6 माह तक शिशु के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार है।
  • माँ का दूध शिशु को रोगों से बचाता है।
  • शिशु को माँ के शरीर से गर्माहट मिलती है।
  • माता और शिशु में घनिष्ठ और स्नेहपूर्ण सम्बन्ध बनता है।

स्तनपान कराने से माँ को लाभः

  • जन्म के तुरन्त बाद स्तनपान से गर्भाशय सिकुड़ने में सहायता मिलती है।
  • प्रसव पश्चात् प्लेसेंटा (आंवल) जल्द बाहर आता है।
  • प्रसव के बाद अधिक खून बहने का खतरा घट जाता है।

दूध पिलाते समय माँ व बच्चे की अवस्था क्या होनी चाहिये?

  • माँ आराम से अपनी पीठ को सहारा देते हुए बैठे तथा शिशु को कमर एवं निचले भाग से सहारा देकर पकड़े।
  • शिशु का शरीर एवं चेहरा माँ के शरीर की तरफ मुड़ा हो।
  • दूध पीते समय बच्चे का निचला होंठ नीचे की ओर झुका हुआ हो तथा मुँह बड़ा खुला हो एवं नाक माँ के स्तन को छू रही हो। माँ के स्तन का अधिकतर भूरा भाग बच्चे के मुँह के अन्दर हो तथा बच्चे के दूध गटकने की आवाज सुनाई दे।